शैक्षिक तकनीकी
प्रस्तावना और अर्थ : (Introduction
and meaning )
प्रागैतिहासिक काल के मानव से लेकर वर्तमान काल
के सभ्य और विकसित मानव तक के इस विराट सफ़र में मानव जीवन को जिस चीज़ ने सर्वाधिक
प्रभावित किया है, वह है शिक्षा | आदिम
मनुष्यों के गुफा और वन की सभ्यता से बढ़ते हुए आज समुद्र के नीचे और चाँद पर बसने
तक की योजना में शिक्षा का योगदान अद्वितीय है | मानव विकास क्रम के प्रत्येक पक्ष
को शिक्षा ने प्रभावित किया है | मानव के विकास के विभिन्न सूचकांकों और मानकों
में शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है | वस्तुतः शिक्षा ही वह अस्त्र है जिसने मानव
को सभ्य, सुसंस्कृत और योग्य तथा कुशल सामाजिक प्राणी बनाकर इसे जीवविज्ञान की
धारणाओं से पृथक किया है | प्रस्तुत अध्याय में शिक्षा तकनीकी के विविध पक्षों के
विषय में जानने से पूर्व शिक्षा और तकनीकी
के पदों पर विचार किया जाना आवश्यक है |
शिक्षा- शिक्षा शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष’ धातु में ‘अ’
प्रत्यय के लगाने से हुआ है | ‘शिक्ष’ का अर्थ है-सीखना और सिखाना | इसलिए शिक्षा
का अर्थ है - सीखने और सिखाने की प्रक्रिया | इसी प्रकार यदि हम शिक्षा की
अंग्रेजी education पर विचार करें तो ज्ञात होता है कि इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन
भाषा के शब्द educatum से हुई है | Educatum शब्द लैटिन भाषा के ही E + Duco से
मिलकर बना है | जिसका अर्थ है – अन्दर से बहार की ओर अग्रसर करना अर्थात व्यक्ति
की आन्तरिक शक्तियों का बाहरी प्रकटीकरण ही शिक्षा है | शिक्षा के अर्थ को थोड़ा अधिक समझने के क्रम में
हम कुछ परिभाषाओं पर विचार करते हैं –
पेस्टोलाजी के अनुसार –
“शिक्षा मनुष्य की आंतरिक शक्तियों का
प्राकृतिक, समन्वित एवं प्रगतिशील विकास
है |”
“Education is natural harmonious and progressive development of man’s
innate powers.”
-Pestalozzi
जॉन डीवी के अनुसार -
“शिक्षा का अर्थ किसी व्यक्ति विशेष में
उन समस्त शक्तियों का विकास है जो उसे अपने वातावरण को नियंत्रित करने और निहित संभावनाओ की
पूर्ति में सक्षम बना सकेगी |”
“Education means
the development of all those capacities in the individual which will enable him
to control the environment and fulfill his possibilities.”
-John Dewey
स्वामी विवेकानंद के अनुसार-
“मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति
करना ही शिक्षा है |”
“Education is
manifestation of perfection already present in man.”
-Swami Vivekanand
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार-
“उच्चतम शिक्षा वह है जो हमें केवल सूचना
ही नही देती, वरन हमारे जीवन को प्रत्येक
अस्तित्व के अनुकूल बनती है |”
“The
highest education is that which does not merely give us information but makes
our life in harmony with all existence .”
-R.N. Tagore
उपरोक्त परिभाषाओं के आलोक में यह कहा जा
सकता है कि शिक्षा वस्तुतः एक सोदेश्य सामाजिक प्रक्रिया है जो व्यक्ति का
सर्वांगीण विकास करते हुए उसे समाज का कुशल तथा राष्ट्र का योग्य नागरिक बनाती है |
शिक्षा से जुड़े विविध पक्षों के लिए ही शैक्षिक शब्द प्रयोग किया जाता है | ‘शिक्षा’
शब्द जहाँ व्याकरणिक दृष्टि से ‘संज्ञापद’
है वहीँ ‘शैक्षिक’ शब्द विशेषण है जिसका अर्थ है – शिक्षा से सम्बंधित |
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